मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के उपाय | Tips for Good Mental Health

बिज़ी डे-टुडे लाइफ में हम खुद को टाइम नहीं दे पाते हैं। जिसके चलते हमे शारीरिक और मानसिक रूप से दिक्कतें होनी शुरू हो जाती हैं। किसी भी मनुष्य के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद ज़रूरी है। अगर कोई भी इंसान शारीरक रूप से स्वस्थ है लेकिन उसका मानसिक स्वास्थ्य खराब है तो उसे अपनी लाइफ में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते उस इंसान में चिड़चिड़ापन, तनाव और बार-बार चीज़ों पर हाइपर होना लाज़मी है। मानसिक स्वास्थ्य से एक व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का पता चलता है, उस इंसान के अंदर सेल्फ कॉन्फिडेंस आता है कि वे जीवन में तनाव से सामना कर सकता है। मानसिक स्वास्थ में हमारे इमोशनल, साइकोलॉजिकल और सोशल वेल्बीइंग शामिल हैं। हमारे सोचने का तरीका, हर चीज़ को महसूस करने का तरीका और कोई भी काम करने का तरीका बेहद ज़रूरी है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ हमारा मानसिक स्वास्थ भी बदलता रहता है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अक्सर लोगों को महंगी-महंगी दवाइयों का सेवन करना पड़ता है लेकिन कहीं न कहीं वो चीज़े कामगार नहीं रहती है। लेकिन कहीं न कहीं लोग मानसिक रूप से ठीक होने के लिए आयुर्वेदा का सहारा लेते है साथ ही डॉक्टर्स का भी आयुर्वेदा पर अटूट विशवास है।
ज़्यादा सोचना, घबराहट और एनज़ाइटी होना, व्यक्तित्व परिवर्तन, खाने या सोने के पैटर्न में बदलाव, ज़्यादा चिंता करना, लंबे समय तक अवसाद और उदासीनता, ज़्यादा गुस्सा करना या हिंसक व्यवहार करना, बहुत ज़्यादा मूड स्विंग्स होना जैसी चीज़े अक्सर मानसिक रूप से बीमार लोगों में पाई जाती हैं जिसके चलते मानसिक रूप से बीमार लोग सबसे अलग रहने लगते हैं और अपनी परेशानियां किसी के भी साथ कतराते हैं।
अगर बात की जाए आयुर्वेदा की, तो आयुर्वेद- आयु यानी उम्र और वेद यानी विज्ञान को मिलाकर बना है, इस तरह ये जीवन का विज्ञान कहा गया है। ऐसा विज्ञान जिसके दायरे में मन, शरीर और आत्मा तीनों आते हैं। ये प्राचीन उपचार भारत के कई हिस्सों में लोकप्रिय है क्योंकि इसमें साइड एफेक्ट नहीं होते हैं। जबकि ये एक सामान्य जानकारी है कि आयुर्वेद का इस्तेमाल शारीरिक व्याधियों में होता है, लेकिन ये मानसिक विकारों के इलाज में भी वैकल्पिक और पूरक थेरेपी के रूप में इस्तेमाल की जाती है।

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